एंटी-मिथेनोजेनिक फीड सप्लीमेंट: हरित धारा


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चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research- ICAR) ने  ‘हरित धारा’ (Harit Dhara) नामक एक एंटी-मिथेनोजेनिक फीड सप्लीमेंट (Anti-Methanogenic Feed Supplement) विकसित किया है, जो मवेशियों द्वारा किये जाने वाले मीथेन उत्सर्जन में 17-20% की कटौती कर सकता है और इसके परिणामस्वरूप दूध का उत्पादन भी बढ़ सकता है।

प्रमुख बिंदु 

हरित धारा के विषय में:

  • हरित धारा हाइड्रोजन उत्पादन के लिये ज़िम्मेदार आमाशय/रुमेण (Rumen) में प्रोटोजोआ रोगाणुओं की आबादी को कम करता है और मीथेन तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की कमी हेतु आर्किया (बैक्टीरिया समान संरचना) को उपलब्ध कराता है।
  • इसे टैनिन युक्त पौधों पर आधारित स्रोतों से बनाया गया है। टैनिन, कड़वे और कसैले रासायनिक यौगिकों वाले उष्णकटिबंधीय पौधों को रुमेण से प्रोटोजोआ को हटाने के लिये जाना जाता है।
  • हरित धारा का उपयोग करने के बाद किण्वन अधिक प्रोपियॉनिक अम्ल (Propionic Acid) का उत्पादन करने में मदद करेगा, जो लैक्टोज (दूध शर्करा) के उत्पादन और शरीर के वज़न को बढ़ाने के लिये अधिक ऊर्जा प्रदान करता है।

मवेशियों में मीथेन का उत्पादन:

  • रुमेण, चार कोष्ठ (Stomachs) में से पहला है जहाँ मवेशी द्वारा खाए गए पदार्थ का  सेलूलोज़, फाइबर, स्टार्च, शर्करा आदि पचता है। ये आगे पाचन और पोषक तत्त्वों के अवशोषण से पहले सूक्ष्मजीवों द्वारा किण्वित कर दिये जाते हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट किण्वन से कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन का उत्पादन होता है। इनका उपयोग रुमेण में मौजूद रोगाणुओं (आर्किया) द्वारा मीथेन का उत्पादन करने के लिये किया जाता है।

मवेशियों द्वारा मीथेन उत्सर्जन:

  • वैश्विक स्तर पर कुल 90 मिलियन टन से अधिक पशुधन में से भारत में बेल्चिंग मवेशी, भैंस, भेड़ तथा बकरियाँ वार्षिक अनुमानित 9.25 मिलियन टन  से 14.2 मिलियन टन मीथेन का उत्सर्जन करती हैं।
  • 2019 की पशुधन जनगणना के अनुसार भारत की मवेशियों की आबादी में 193.46 मिलियन गाय के साथ-साथ 109.85 मिलियन भैंसे, 148.88 मिलियन बकरियाँ, 74.26 मिलियन भेड़ें थी।
Livestock-Headcount

  • बड़े पैमाने पर कृषि अवशेषों– गेहूँ / धान की भूसी और मक्का, ज्वार या बाजरा को चारे के रूप में खिलाए जाने के कारण भारत में जुगाली करने वाले पशु अपने समकक्ष औद्योगिक देशों  की तुलना में 50-100% अधिक मीथेन का उत्पादन करते हैं, जिन्हें अधिक आसानी से किण्वित / पचने योग्य सांद्रता, साइलेज और हरा चारा दिया जाता है।
  • मीथेन की ग्लोबल वार्मिंग क्षमता इसे 100 वर्षों में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का 25 गुना अधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस बनाती है।

पशुधन से संबंधित सरकारी पहल:

  • पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF): इसकी स्थापना डेयरी प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और पशु आहार इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश को सपोर्ट करने के लिये की गई थी।
  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन: इसका उद्देश्य गोजातीय आबादी की स्वदेशी नस्लों का विकास और संरक्षण करना है, साथ ही दूध उत्पादन को बढ़ाना और इसे किसानों के लिये अधिक लाभकारी बनाना है।
  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन: इसे वर्ष 2014-15 में पशुधन उत्पादन प्रणालियों और सभी हितधारकों के क्षमता निर्माण में मात्रात्मक तथा गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करने के लिये शुरू किया गया था।
  • राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम: इसे कुछ रोगों के प्रसार को रोकने के लिये शुरू किया गया था जो कि जननांग प्रकृति के होते हैं, जिससे नस्ल की दक्षता में वृद्धि होती है।

स्रोत- drishtiias

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